इतनी भी क्या ज़िद थी, ख़ुद को मिटाने की – Dard Bhari Shayari 🖤

इतनी भी क्या ज़िद थी,ख़ुद को मिटाने की एक नज़र देख लेते,तकलीफ़े बहुत थी जमाने की !!🖤 अजनबी को एक नाम मिल गया है दुआएं की थी ईनाम मिल गया है !!🖤 मौत से कैसा डर वो तो मिनटों का खेल है, आफत तो जिंदगी है जो बरसों चला करती है !!🖤 बेज़ार हो गए …

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